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समकालीन

हिंदी साहित्य की समकालीनता को जानने समझने के लिए जनवादी साहित्य के साथ साथ आदिवासी साहित्य ,दलित साहित्य,ओबीसी साहित्य ,बहुजन साहित्य और अर्जक साहित्य की अवधारणा से परिचित होना जरुरी है.इनमें अर्जक साहित्य का लेखन भी बहुत हुआ है.बोकारो में बहुत से अर्जक साहित्यकार अर्जक संघ के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिये थे.अर्जक साहित्य का मुख्य स्वर इहलौकिकता के खिलाफ है.भाग्य ,भगवान ,पाखँड इनके साहित्य से नदारद है.कुल मिलाकर यह साहित्य पुरोहितवाद व अश्रमिक वर्ग -जिसे जोंक वर्ग कहते हैं ;के विरोध में खडा है.इससे हिंदी साहित्य की गतिशीलता का पता चलता है. ओबीसी साहित्य क्या है ?जानना चाहते हैं धान के खेतों में जाइए और देखिए छह माह का बच्चा पथारी पर सोया है माँ धान काट रही है और पिता बगल के खेत में जनक की तरह हल चला रहे .