पत्र
Dear सखे,
कृष्ण जन्माष्ठमी की हार्दिक बधाई!
प्रिये,
ईश्वर ने आपको बहुत कुछ दिया है-समझदारी, सुंदरता, प्रेम, सद्बुद्धि, ज्ञान और कुशलता। आज आपकी परीक्षा भी है और हम सबका व्रत भी। कृष्ण का जीवन संघर्ष और प्रेम का जीवन है, दुख से त्राण दिलाकर खुशी और वैभव की ओर सरलता के साथ ले जाना उनका दर्शन है। वे प्रेम के सहारे आनंद को निम्मज्जित करते हैं। उनके होठों पर मुस्कान का वैभव है। वे हृदय को जीत लेने के लिए पर्याप्त है।
हम तुच्छ मानव जो उनके अंश मात्र हैं। हम इच्छा , अनिच्छा , गुण -अवगुण के पुतले हैं। प्रेम ही से हम इस जीवन को खुशहाल बना सकते हैं तथा उसे जीत सकते हैं। प्रेम अपने आप में एक वैभव है,मोतियों का खान है। और ये मोती प्रेम के जरिये ही आकार पाता है-कभी अश्रु कण बनकर, कभी चुंबन का बोसा बनकर।
आज के दिन मैं मिलना चाहता था। इन आँखों में आपकी सूरत को सामने से जीना चाहता था। आपके प्रेम व स्नेह को , जैसा कि कृष्ण का दर्शन है-अनुभवकर , पाकर इस मानव जीवन को, इसकी लघुता को अमर करना चाहता था। मेरे भीतर की तड़प ऐसे भी मुझे जीने कहाँ दे रही है। आपकी याद कितनी बार आती है-एक दिन, एक घंटे, एक मिनट, एक सेकेंड , एक पल में मेरे लिए बताना मुश्किल है। लगता है-तड़पते-तड़पते एक दिन मर जाऊँगा!
मेरी सखी, यह जानते हुए भी कि आप सामाजिक बंधनों, बंदिशों के बावजूद समय और प्रेम की अनिवार्यता को जी लेती हो-यह मेरे लिए कम नहीं है। मेरी ये आँखें इस प्यारी सखी के लिए अभी भी तरस रही है। ये हृदय तड़प रहा है। मेरे ईश्वर इस जीवन को धन्य बनाएंगे या नहीं । मैं नहीं जानता। मैं समर्पण करता हूँ अपने आप को , उनके कदमों में।
ये प्रेम, ये प्रेम के आँसू मुझे जीने का संबल देंगे। डर लगता है-टूटने से। सपने को मरने से। कोई सपना हज़ार सपनों पर भारी होता है और सपने का नाम है-पूनम!
आप परीक्षा अच्छे से दीजिएगा। निश्चिंत होकर, बेफिक़्र होकर। ईश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करें।
I miss you.
I love you.
जय श्री कृष्णा, जय गोकुल गिरिधारी
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